एक प्यार भरी दास्तान | Ek pyar bhari dastan | Best Hindi story 2019

            एक प्यार भरी दास्तान





एक रात फीर नमन को स्वपन आता है की उसे कोई दुर एक छोटे-से गांव में बुला रहा होता है। गांव एक अंतरीयाल इलाके में है जीसके आसपास दुर दुर तक रेगीस्तान नज़र आ रहा है। 

इस रेगिस्तान की रेत की डमरी में उसकी कुछ यादें ताजा हो जाती है। कीसी मां की ममता की पुकार उसे सुनाई देती हैं। उसकी आंखों के सामने अंधेरा छा जाता है। और उस वक्त कीसी की चलने की और पायल की आवाज़ सुनाई देती हैं।

 लेकिन उसी वक्त नमन को अपनी मां की आवाज़ सुनाई देती हैं। "नमन उठो, सुबह हो गई तुम्हें शाला में भी जाना है"। उसी वक्त नमन की आंख खुलती हैं और उसे अपने घर में सोया हुआ पाता है। थोड़ी देर उसको लगता है की कौन थे वो लोग लेकिन उसके बाद दीमाग में जोर देने के बावजूद भी कुछ ज्यादा याद नही आता है। नमन अपने रोज के काम में लग जाता है। 

रोज शाला में पढ़ना, दोस्तों के साथ खेलना बस यही तो है रोज का काम। मम्मी को काम में मदद करना और पप्पा को बेंक और व्यापार के काम में मदद करना। दीन ऐसे ही कट रहे हैं। समय बितता जा रहा है। 

जिंदगी बचपन छीन रही है बस, यही हो रहा है। फीर एक रात वो ही स्वपन आता है लेकिन सुबह कुछ दिमाग़ में समझ नही आता।

फीर वो ही काम और हररोज की जिंदगी। एक बार शाला की छुट्टियों में बहार घुमने जाने की तैयारी होती है। पुरे परिवार के साथ। पता नहीं लेकिन किस्मत का कुछ जोडाण होगा और हमै घुमने जाने का स्थान में भी यही जगह शामिल होती है।

 हम सब लोग काफी जगह पे घुमने के बाद अंत में वो ही जगह पे जाना होता हैं। हम सब लोग अपनी अपनी कार से शाम तक पहोंचे थे। और वही की एक होटल में खाना खाने के बाद थोड़ी सी मोज मस्ती करने के बाद सो जाते हैं। उसी रात तो अजीबोगरीब चीजें मेरे साथ होने लगती हैं। 

मेरे सामने काफी सारी यादें उस रेगिस्तान से जुड़ी आने लगती हैं। कोई गांव और उस गांव की एक गली में दौड़ रहा हूं। लेकिन मैं अपने आपको नही पहचान पा रहा हूं। जैसे कोई और है। लेकिन उसमें मेरी आत्मा तो मुझे एकदम नजर आ रही है। 

उस गांव के पास में एक कुवा हैं और उस कुवा के किनारे पे एक मंदिर है। गांव के क्या काम कर रहे हैं वो मैं कुछ समझ नहीं पाता हूं। और उसके साथ सुबह हो जाती हैं। सब लोग अच्छी तरह से तैयार होने के बाद वही आसपास नीकल जातें हैं।

उसी वक्त नमन एकदम सामान्य रहता हूं क्युकी की हमे दीन की सारी यादें रात में आभास होती हैं ऐसा मैं समझ लेता हूं। हम सब घुमते घुमते दोपहर तक उस गांव में पहोंच जातें है। जहां आज मुझे पहोचना ही था। 

जब मैं उस गांव में पहोचता हु तब मेरे पैर के नीचे से धरती हिलने लगती है। क्युकी वो ही गांव हैं जो मुझे कही साल से मेरे सामने आ जा रहा है। 

मेरी आंखों के सामने अंधेरा छा जाता है। मेरी कुछ समझ नहीं आता है और मैं जब डायी और देखता हूं तो वो ही कुवा है जो मुझे कल ही स्वपन में आया था। मुझे कुछ कुछ याद आने लगता है। 

दोस्तों अगर आप चाहते हों की इस कहानी को आगे बढाये तो कोमेनट में बताये।



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